अपने को संभाला और मसहरी पर लेट दरवाजे की तरफ देखने लगे। सवेरा हुआ ही चाहता था कि तेजसिंह पीठ पर एक गट्ठा लादे आ पहुंचे। पहरे वाले इस हालत में इनको देख हैरान थे, मगर खौफ से कुछ कह नहीं सकते थे। तेजसिंह ने वीरेन्द्रसिंह के केमरे में पहुंचकर देखा कि अभी तक वे जाग रहे हैं। वीरेन्द्रसिंह तेजसिंह को देखते ही वह उठ खड़े हुए और बोले, ‘‘कहो भाई, क्या खबर लाये ?’’
तेजसिंह ने वहाँ का सब हाल सुनाया, चन्द्रकान्ता की चिट्ठी हाथ पर रख दी,
अपने को संभाला और मसहरी पर लेट दरवाजे की तरफ देखने लगे। सवेरा हुआ ही चाहता था कि तेजसिंह पीठ पर एक गट्ठा लादे आ पहुंचे। पहरे वाले इस हालत में इनको देख हैरान थे, मगर खौफ से कुछ कह नहीं सकते थे। तेजसिंह ने वीरेन्द्रसिंह के केमरे में पहुंचकर देखा कि अभी तक वे जाग रहे हैं। वीरेन्द्रसिंह तेजसिंह को देखते ही वह उठ खड़े हुए और बोले, ‘‘कहो भाई, क्या खबर लाये ?’’
तेजसिंह ने वहाँ का सब हाल सुनाया, चन्द्रकान्ता की चिट्ठी हाथ पर रख दी,