चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

अहमद को गठरी खोल कर दिखा दिया औऱ कहा, ‘‘यह चिट्ठी है, और यह सौगात है !’’

वीरेन्द्रसिंह बहुत खश हुए। चिट्ठी को कई मर्तबा पढ़ा और आंखों से लगाया, फिर तेजसिंह से कहा, ‘‘सुनो भाई, इस अहमद को ऐसी जगह रक्खो जहाँ किसी को मालूम न हो, अगर जयसिंह को खबर लगेगी तो फसाद बढ़ जायेगा।

तेजसिंह: इस बात को मैं पहले से सोच चुका हूँ। मैं इसको एक पहाड़ी खोह में रख आता हूँ जिसको मैं ही जानता हूँ।

यह कह तेजसिंह ने फिर अहमद की गठरी बाँधी और


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अहमद को गठरी खोल कर दिखा दिया औऱ कहा, ‘‘यह चिट्ठी है, और यह सौगात है !’’

वीरेन्द्रसिंह बहुत खश हुए। चिट्ठी को कई मर्तबा पढ़ा और आंखों से लगाया, फिर तेजसिंह से कहा, ‘‘सुनो भाई, इस अहमद को ऐसी जगह रक्खो जहाँ किसी को मालूम न हो, अगर जयसिंह को खबर लगेगी तो फसाद बढ़ जायेगा।

तेजसिंह: इस बात को मैं पहले से सोच चुका हूँ। मैं इसको एक पहाड़ी खोह में रख आता हूँ जिसको मैं ही जानता हूँ।

यह कह तेजसिंह ने फिर अहमद की गठरी बाँधी और


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