तष्टी, कटोरियां सब साफ की हुई थीं और नरम ऊनी आसन बिछा हुआ था जिस पर एक छोटा-सा बेल भी पड़ा था।
कुमार इस बात पर गौर कर रहे थे कि वे कहां आ पहुंचे, उन्हें कौन लाया, इस जगह का नाम क्या है तथा यह बाग और कमरा किसका है? इतने में ही उस पेड़ की तरफ निगाह जा पड़ी जिसके नीचे पूजा का सब सामान सजाया हुआ था। एक कागज चिपका हुआ नजर पड़ा। उसके पास गये, देखा कि कुछ लिखा हुआ है। पढ़ा, यह लिखा था-
“कुंअर वीरेन्द्रसिंह, यह सब सामान तुम्हारे
तष्टी, कटोरियां सब साफ की हुई थीं और नरम ऊनी आसन बिछा हुआ था जिस पर एक छोटा-सा बेल भी पड़ा था।
कुमार इस बात पर गौर कर रहे थे कि वे कहां आ पहुंचे, उन्हें कौन लाया, इस जगह का नाम क्या है तथा यह बाग और कमरा किसका है? इतने में ही उस पेड़ की तरफ निगाह जा पड़ी जिसके नीचे पूजा का सब सामान सजाया हुआ था। एक कागज चिपका हुआ नजर पड़ा। उसके पास गये, देखा कि कुछ लिखा हुआ है। पढ़ा, यह लिखा था-
“कुंअर वीरेन्द्रसिंह, यह सब सामान तुम्हारे