चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

खूब कड़ी धूप फैली हुई थी। धूप के मारे तबीयत घबड़ा उठी, यही जी चाहता था कि कहीं ठण्डी जगह मिले तो आराम किया जाय। आखिर उस जगह से हट कुमार घूमते हुए उस दूसरी तरफ वाले कमरे को देखने चले जिसमें किवाड़ पहर भर पहले बंद पाये थे, वे अब खुले हुए दिखलाई पड़े, अंदर गए।

भीतर से यह कमरा बहुत साफ संगमर्मर के फर्श का था, मालूम होता था कि अभी कोई इसे धोकर साफ कर गया है। बीच में एक काश्मीरी गलीचा बिछा हुआ था। आगे उसके कई तरह की भोजन की


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खूब कड़ी धूप फैली हुई थी। धूप के मारे तबीयत घबड़ा उठी, यही जी चाहता था कि कहीं ठण्डी जगह मिले तो आराम किया जाय। आखिर उस जगह से हट कुमार घूमते हुए उस दूसरी तरफ वाले कमरे को देखने चले जिसमें किवाड़ पहर भर पहले बंद पाये थे, वे अब खुले हुए दिखलाई पड़े, अंदर गए।

भीतर से यह कमरा बहुत साफ संगमर्मर के फर्श का था, मालूम होता था कि अभी कोई इसे धोकर साफ कर गया है। बीच में एक काश्मीरी गलीचा बिछा हुआ था। आगे उसके कई तरह की भोजन की


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