चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

चीजें चांदी और सोने के बरतनों में सजाई हुई रखी थीं। आसन पर एक खत पड़ी हुई थी जिसे कुमार ने उठाकर पढ़ा, यह लिखा हुआ था-

“आप किसी तरह घबड़ाएं नहीं, यह मकान आपके एक दोस्त का है जहां हर तरह से आपकी खातिर की जायगी। इस वक्त आप भोजन करके बगल की कोठरी में जहां आपके लिए पलंग बिछा है कुछ देर आराम करें।”

इसे पढ़कर कुमार जी में सोचने लगे कि अब क्या करना चाहिए। भूख बड़े जोर की लगी है पर बिना मालिक के इन चीजों को खाने को जी नहीं


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चीजें चांदी और सोने के बरतनों में सजाई हुई रखी थीं। आसन पर एक खत पड़ी हुई थी जिसे कुमार ने उठाकर पढ़ा, यह लिखा हुआ था-

“आप किसी तरह घबड़ाएं नहीं, यह मकान आपके एक दोस्त का है जहां हर तरह से आपकी खातिर की जायगी। इस वक्त आप भोजन करके बगल की कोठरी में जहां आपके लिए पलंग बिछा है कुछ देर आराम करें।”

इसे पढ़कर कुमार जी में सोचने लगे कि अब क्या करना चाहिए। भूख बड़े जोर की लगी है पर बिना मालिक के इन चीजों को खाने को जी नहीं


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