इस बाग में तो और भी बातें दिखाई देती हैं जिसमें कुमारी चंद्रकान्ता की तस्वीर और उनके दरबार का लगना और भी हैरान कर रहा है। इसी सोच-विचार में गर्दन झुकाये लौंडियों के साथ चले गए, इसका कुछ भी ख्याल नहीं कि कहां जाते हैं, कौन लिए जाता है, या कैसे सजे हुए मकान में बैठाये गये हैं।
जमीन पर फर्श बिछा हुआ और गद्दी लगी हुई थी, बड़े तकिए के सिवाय और भी कई तकिए पड़े हुए थे। कुमार उस गद्दी पर बैठ गए और दो घंटे तक सिर झुकाये ऐसा सोचते
इस बाग में तो और भी बातें दिखाई देती हैं जिसमें कुमारी चंद्रकान्ता की तस्वीर और उनके दरबार का लगना और भी हैरान कर रहा है। इसी सोच-विचार में गर्दन झुकाये लौंडियों के साथ चले गए, इसका कुछ भी ख्याल नहीं कि कहां जाते हैं, कौन लिए जाता है, या कैसे सजे हुए मकान में बैठाये गये हैं।
जमीन पर फर्श बिछा हुआ और गद्दी लगी हुई थी, बड़े तकिए के सिवाय और भी कई तकिए पड़े हुए थे। कुमार उस गद्दी पर बैठ गए और दो घंटे तक सिर झुकाये ऐसा सोचते