रहे कि तनोबदन की बिल्कुल खबर न रही। प्यास मालूम हुई तो पानी के लिए इधर-उधर देखने लगे। एक लौंडी सामने खड़ी थी, उसने हाथ जोड़कर पूछा, “क्या हुक्म होता है?” जिसके जवाब में कुमार ने हाथ के इशारे से पानी मांगा। सोने के कटोरे में पानी भर के लौंडी ने कुमार के हाथ में दिया, पीते ही एकदम उनके दिमाग तक ठंडक पहुंच गई साथ ही आंखों में झपकी आने लगी और धीरे – धीरे बिल्कुल बेहोश होकर उसी गद्दी पर लेट गये।
चन्द्रकान्ता ( तीसरा भाग : बारहवां बयान)
रहे कि तनोबदन की बिल्कुल खबर न रही। प्यास मालूम हुई तो पानी के लिए इधर-उधर देखने लगे। एक लौंडी सामने खड़ी थी, उसने हाथ जोड़कर पूछा, “क्या हुक्म होता है?” जिसके जवाब में कुमार ने हाथ के इशारे से पानी मांगा। सोने के कटोरे में पानी भर के लौंडी ने कुमार के हाथ में दिया, पीते ही एकदम उनके दिमाग तक ठंडक पहुंच गई साथ ही आंखों में झपकी आने लगी और धीरे – धीरे बिल्कुल बेहोश होकर उसी गद्दी पर लेट गये।
चन्द्रकान्ता ( तीसरा भाग : बारहवां बयान)