की दोस्ती कबूल कर ली और उनका दीवान बहुत कुछ नजर लेकर आया है,अब क्या हुआ?
जासूस-उस वक्त की वह खबर बहुत ठीक थी पर आखिर में उसने धोखा दिया और बेईमानी पर कमर बांधा ली।
जीत-उसके हमले का क्या नतीजा हुआ?
जासूस-पहर भर तक तो फतहसिंह सिपहसालार खूब लड़े, आखिर शिवदत्त के हाथ से जख्मी होकर गिरफ्तार हो गये। उनके गिरफ्तार होते ही बेसिर की फौज तितिर-बितिर हो गई।
अभी तक सुरेन्द्रसिंह चुपचाप बैठे इन बातों को सुन रहे थे। फतहसिंह के
की दोस्ती कबूल कर ली और उनका दीवान बहुत कुछ नजर लेकर आया है,अब क्या हुआ?
जासूस-उस वक्त की वह खबर बहुत ठीक थी पर आखिर में उसने धोखा दिया और बेईमानी पर कमर बांधा ली।
जीत-उसके हमले का क्या नतीजा हुआ?
जासूस-पहर भर तक तो फतहसिंह सिपहसालार खूब लड़े, आखिर शिवदत्त के हाथ से जख्मी होकर गिरफ्तार हो गये। उनके गिरफ्तार होते ही बेसिर की फौज तितिर-बितिर हो गई।
अभी तक सुरेन्द्रसिंह चुपचाप बैठे इन बातों को सुन रहे थे। फतहसिंह के