तेज-इसकी कोशिश तो आप बेफायदे करते हैं, अगर दरवाजा खुला भी तो क्या काम निकलेगा?
ज्यो-अच्छा चलो तो।
तेज-खैर चलो।
तीनों ऐयार तहखाने की तरफ रवाना हुए।
चन्द्रकान्ता ( तीसरा भाग : तेरहवां बयान)
कुंअर वीरेन्द्रसिंह धीरे – धीरे बेहोश होकर उस गद्दी पर लेट गए। जब आंख खुली अपने को एक पत्थर की चट्टान पर सोये पाया। घबराकर इधर-उधरदेखने लगे। चारों तरफ ऊंची-ऊंची पहाड़ी, बीच में बहता चश्मा, किनारे-किनारे जामुन के दरख्तों की बहार
तेज-इसकी कोशिश तो आप बेफायदे करते हैं, अगर दरवाजा खुला भी तो क्या काम निकलेगा?
ज्यो-अच्छा चलो तो।
तेज-खैर चलो।
तीनों ऐयार तहखाने की तरफ रवाना हुए।
चन्द्रकान्ता ( तीसरा भाग : तेरहवां बयान)
कुंअर वीरेन्द्रसिंह धीरे – धीरे बेहोश होकर उस गद्दी पर लेट गए। जब आंख खुली अपने को एक पत्थर की चट्टान पर सोये पाया। घबराकर इधर-उधरदेखने लगे। चारों तरफ ऊंची-ऊंची पहाड़ी, बीच में बहता चश्मा, किनारे-किनारे जामुन के दरख्तों की बहार