चन्द्रकान्ता - Chandrakanta



चोब – क्यों न चलूंगा, मुझे उसने अधामरा कर डाला था, अब बिना गिरफ्तार कराये कब चैन पड़ना है!

बद्री – अच्छा चलो।

बद्रीनाथ, पन्नालाल, रामनारायण और चुन्नीलाल चारों आदमी अंदर की तरफ चले, साथ – साथ जख्मी चोबदार भी रवाना हुआ। जनाने महल के पास पहुंचकर देखा कि एक आदमी जमीन पर बदहवास पड़ा है, एक मशाल थोड़ी दूर पर पड़ी हुई है जो कुछ जल रही है, पास ही तेल की कुप्पी भी नजर पड़ी,मालूम हो गया कि कोई मशालची है। चोबदार ने चौंककर कहा,


899 of 1230



चोब – क्यों न चलूंगा, मुझे उसने अधामरा कर डाला था, अब बिना गिरफ्तार कराये कब चैन पड़ना है!

बद्री – अच्छा चलो।

बद्रीनाथ, पन्नालाल, रामनारायण और चुन्नीलाल चारों आदमी अंदर की तरफ चले, साथ – साथ जख्मी चोबदार भी रवाना हुआ। जनाने महल के पास पहुंचकर देखा कि एक आदमी जमीन पर बदहवास पड़ा है, एक मशाल थोड़ी दूर पर पड़ी हुई है जो कुछ जल रही है, पास ही तेल की कुप्पी भी नजर पड़ी,मालूम हो गया कि कोई मशालची है। चोबदार ने चौंककर कहा,


899 of 1230