चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

अफसोस ! इस समय अहमद न हुआ नहीं तो बड़ा काम निकलता। खैर, देखा जाएगा। ’’ वह कह क्रूरसिंह से बिदा हो बालादवी* के वास्ते चला गया।

तेजसिंह वीरेन्द्रसिंह से रुखसत हो विजयगढ़ पहुंचे और मंत्री के मरने तथा शहर भर में गम छाने का हाल लेकर वीरेन्द्रसिंह के पास लौट आये। यह भी खबर लाये कि दो दिन बाद सूतक निकल जाने पर महाराज जयसिंह क्रूर को अपना दीवान बनायेंगे।

वीरेन्द्रसिंहः देखो, क्रूर ने चन्द्रकान्ता के बाप को मार डाला। अगर राजा को भी मार डाले तो ऐसे आदमी का क्या ठिकाना !


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अफसोस ! इस समय अहमद न हुआ नहीं तो बड़ा काम निकलता। खैर, देखा जाएगा। ’’ वह कह क्रूरसिंह से बिदा हो बालादवी* के वास्ते चला गया।

तेजसिंह वीरेन्द्रसिंह से रुखसत हो विजयगढ़ पहुंचे और मंत्री के मरने तथा शहर भर में गम छाने का हाल लेकर वीरेन्द्रसिंह के पास लौट आये। यह भी खबर लाये कि दो दिन बाद सूतक निकल जाने पर महाराज जयसिंह क्रूर को अपना दीवान बनायेंगे।

वीरेन्द्रसिंहः देखो, क्रूर ने चन्द्रकान्ता के बाप को मार डाला। अगर राजा को भी मार डाले तो ऐसे आदमी का क्या ठिकाना !


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