रात ही को सही। रात-भर किले के अंदर ही छिपे रहेंगे, सुबह जब लड़ाई खूब रंग पर आएगी उसी वक्त फाटक पर टूट पड़ेंगे। सब ऊपर फसीलों पर चढ़े होंगे, फाटक पर सौ-पचास आदमियों में घुस कर दरवाजा खोल देना कोई बात नहीं है।’
देवीसिंह – ‘कुमार की राय बहुत सही है, मगर ज्योतिषी जी को बाहर ही छोड़ देना चाहिए।’
ज्योतिषी – ‘सो क्यों?’
देवीसिंह – ‘आप ब्राह्मण हैं, वहाँ क्यों ब्रह्महत्या के लिए आपको ले चलें, यह काम क्षत्रियों का है, आपका नहीं।’
रात ही को सही। रात-भर किले के अंदर ही छिपे रहेंगे, सुबह जब लड़ाई खूब रंग पर आएगी उसी वक्त फाटक पर टूट पड़ेंगे। सब ऊपर फसीलों पर चढ़े होंगे, फाटक पर सौ-पचास आदमियों में घुस कर दरवाजा खोल देना कोई बात नहीं है।’
देवीसिंह – ‘कुमार की राय बहुत सही है, मगर ज्योतिषी जी को बाहर ही छोड़ देना चाहिए।’
ज्योतिषी – ‘सो क्यों?’
देवीसिंह – ‘आप ब्राह्मण हैं, वहाँ क्यों ब्रह्महत्या के लिए आपको ले चलें, यह काम क्षत्रियों का है, आपका नहीं।’