कुमार – ‘हाँ ज्योतिषी जी, आप किले में मत जाइए।’
ज्योतिषी – ‘अगर मैं ऐयारी न जानता होता तो आपका ऐसा कहना मुनासिब था, मगर जो ऐयारी जानता है उसके आगे जवाँमर्दी और दिलावरी हाथ जोड़े खड़ी रहती हैं।’
देवीसिंह – ‘अच्छा चलिए फिर, हमको क्या, हमें तो और फायदा ही है।’
कुमार – ‘फायदा क्या?’
देवीसिंह – इसमें तो कोई शक नहीं ज्योतिषी जी हम लोगों के पूरे दोस्त हैं, कभी संग न छोड़ेंगे, अगर यह मर भी जाएँगे तो ब्रह्मराक्षस होंगे, और भी हमारा काम इनसे निकला करेगा।’
कुमार – ‘हाँ ज्योतिषी जी, आप किले में मत जाइए।’
ज्योतिषी – ‘अगर मैं ऐयारी न जानता होता तो आपका ऐसा कहना मुनासिब था, मगर जो ऐयारी जानता है उसके आगे जवाँमर्दी और दिलावरी हाथ जोड़े खड़ी रहती हैं।’
देवीसिंह – ‘अच्छा चलिए फिर, हमको क्या, हमें तो और फायदा ही है।’
कुमार – ‘फायदा क्या?’
देवीसिंह – इसमें तो कोई शक नहीं ज्योतिषी जी हम लोगों के पूरे दोस्त हैं, कभी संग न छोड़ेंगे, अगर यह मर भी जाएँगे तो ब्रह्मराक्षस होंगे, और भी हमारा काम इनसे निकला करेगा।’