तेजसिंह और देवीसिंह झंडियाँ लिए चरणों पर गिर पड़े, ज्योतिषी जी ने आशीर्वाद दिया। इससे ज्यादा न ठहर सके, जख्मों के दर्द से चारों बेहोश हो कर जमीन पर गिर पड़े और बदन से खून निकलने लगा।
जीतसिंह ने पहुँच कर चारों के जख्मों पर पट्टी बाँधी, चेहरा धुलने से ये चारों पहचाने गए। थोड़ी देर में ये सब होश में आ गए। राजा सुरेंद्रसिंह अपने प्यारे लड़के को देर तक छाती से लगाए रहे और तीनों ऐयारों पर भी बहुत मेहरबानी की। महाराज जयसिंह
तेजसिंह और देवीसिंह झंडियाँ लिए चरणों पर गिर पड़े, ज्योतिषी जी ने आशीर्वाद दिया। इससे ज्यादा न ठहर सके, जख्मों के दर्द से चारों बेहोश हो कर जमीन पर गिर पड़े और बदन से खून निकलने लगा।
जीतसिंह ने पहुँच कर चारों के जख्मों पर पट्टी बाँधी, चेहरा धुलने से ये चारों पहचाने गए। थोड़ी देर में ये सब होश में आ गए। राजा सुरेंद्रसिंह अपने प्यारे लड़के को देर तक छाती से लगाए रहे और तीनों ऐयारों पर भी बहुत मेहरबानी की। महाराज जयसिंह