चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

कुमार की दिलावरी पर मोहित हो तारीफ करने लगे। कुमार ने उनके पैरों को हाथ लगाया और खुशी-खुशी दूसरे लोगों से मिले। हमारा कोई आदमी जनाने महल में नहीं गया बल्कि वहाँ इंतजाम करके पहरा मुकर्रर कर दिया गया।

कई दिन के बाद महाराज जयसिंह और राजा सुरेंद्रसिंह कुँवर वीरेंद्रसिंह को तिलिस्म तोड़ने की ताकीद करके खुशी-खुशी विजयगढ़ और नौगढ़ रवाना हुए। उनके जाने के बाद कुँवर वीरेंद्रसिंह अपने ऐयारों और कुछ फौज साथ ले तिलिस्म की तरफ रवाना हुए।


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कुमार की दिलावरी पर मोहित हो तारीफ करने लगे। कुमार ने उनके पैरों को हाथ लगाया और खुशी-खुशी दूसरे लोगों से मिले। हमारा कोई आदमी जनाने महल में नहीं गया बल्कि वहाँ इंतजाम करके पहरा मुकर्रर कर दिया गया।

कई दिन के बाद महाराज जयसिंह और राजा सुरेंद्रसिंह कुँवर वीरेंद्रसिंह को तिलिस्म तोड़ने की ताकीद करके खुशी-खुशी विजयगढ़ और नौगढ़ रवाना हुए। उनके जाने के बाद कुँवर वीरेंद्रसिंह अपने ऐयारों और कुछ फौज साथ ले तिलिस्म की तरफ रवाना हुए।


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