चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

खोला जो उस पत्थर वाले चबूतरे के सिरहाने की तरफ था। नीचे उतर कर कोठरी में से होते हुए उसी बाग में पहुँचे जहाँ खजाने और बारहदरी के सिंहासन के ऊपर का वह पत्थर हाथ लगा था, जिसको छू कर चपला बेहोश हो गई थी और जिसके बारे में तिलिस्मी किताब में लिखा हुआ था कि वह एक डिब्बा है और उसके अंदर एक नायाब चीज रखी है।

चारों आदमी नहर के रास्ते गोता मार कर उसी तरह बाग के उस पार हुए जिस तरह चपला उसके बाहर गई थी और उसी की तरह पहाड़ी के नीचे


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खोला जो उस पत्थर वाले चबूतरे के सिरहाने की तरफ था। नीचे उतर कर कोठरी में से होते हुए उसी बाग में पहुँचे जहाँ खजाने और बारहदरी के सिंहासन के ऊपर का वह पत्थर हाथ लगा था, जिसको छू कर चपला बेहोश हो गई थी और जिसके बारे में तिलिस्मी किताब में लिखा हुआ था कि वह एक डिब्बा है और उसके अंदर एक नायाब चीज रखी है।

चारों आदमी नहर के रास्ते गोता मार कर उसी तरह बाग के उस पार हुए जिस तरह चपला उसके बाहर गई थी और उसी की तरह पहाड़ी के नीचे


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