उसके नीचे थी जिसको देखने से कुमार समझ गए कि जब अजदहे के सामने वाले पत्थर पर कोई पैर रखता है तो यह भाथी चलने लगती है और इसकी हवा की तेजी सामने वाले आदमी को खींच कर अजदहे के मुँह में डाल देती है।
बगल में एक खिड़की थी जिसका दरवाजा बंद था। सामने ताली रखी हुई थी जिससे ताला खोल कर चारों आदमी उसके अंदर गए। यहाँ से वे लोग छत पर चढ़ गए जहाँ से गली की तरह एक खोह दिखाई पड़ी।
किताब से पहले ही मालूम हो चुका था कि यही खोह की-सी गली उस दालान में जाने के लिए राह है,
उसके नीचे थी जिसको देखने से कुमार समझ गए कि जब अजदहे के सामने वाले पत्थर पर कोई पैर रखता है तो यह भाथी चलने लगती है और इसकी हवा की तेजी सामने वाले आदमी को खींच कर अजदहे के मुँह में डाल देती है।
बगल में एक खिड़की थी जिसका दरवाजा बंद था। सामने ताली रखी हुई थी जिससे ताला खोल कर चारों आदमी उसके अंदर गए। यहाँ से वे लोग छत पर चढ़ गए जहाँ से गली की तरह एक खोह दिखाई पड़ी।
किताब से पहले ही मालूम हो चुका था कि यही खोह की-सी गली उस दालान में जाने के लिए राह है,