जहाँ चपला और चंद्रकांता बेबस पड़ी हैं।
अब कुमारी चंद्रकांता से मुलाकात होगी, इस ख्याल से कुमार का जी धड़कने लगा, चपला की मुहब्बत ने तेजसिंह के पैर हिला दिए। खुशी-खुशी ये लोग आगे बढ़े। कुमार सोचते जाते थे कि आज जैसे निराले में कुमारी चंद्रकांता से मुलाकात होगी वैसी पहले कभी न हुई थी। मैं अपने हाथों से उसके बाल सुलझाउँगा, अपनी चादर से उसके बदन की गर्द झड़ूँगा। हाय, बड़ी भारी भूल हो गई, कि कोई धोती उसके पहनने के लिए नहीं लाए,
जहाँ चपला और चंद्रकांता बेबस पड़ी हैं।
अब कुमारी चंद्रकांता से मुलाकात होगी, इस ख्याल से कुमार का जी धड़कने लगा, चपला की मुहब्बत ने तेजसिंह के पैर हिला दिए। खुशी-खुशी ये लोग आगे बढ़े। कुमार सोचते जाते थे कि आज जैसे निराले में कुमारी चंद्रकांता से मुलाकात होगी वैसी पहले कभी न हुई थी। मैं अपने हाथों से उसके बाल सुलझाउँगा, अपनी चादर से उसके बदन की गर्द झड़ूँगा। हाय, बड़ी भारी भूल हो गई, कि कोई धोती उसके पहनने के लिए नहीं लाए,