चन्द्रकान्ता - Chandrakanta



पूरी उम्मीद थी कि कुमारी चंद्रकांता और चपला को यहाँ देखेंगे, मगर वे कहीं नजर न आईं, हाँ जमीन पर पड़ी दो लाशें जरूर दिखाई दीं जिनमें मांस बहुत कम था, सिर से पैर तक नुची हड्डियाँ दिखाई देती थीं, चेहरे किसी के भी दुरुस्त न थे।

इस वक्त कुमार की कैसी दशा थी वे ही जानते होंगे। पागलों की-सी सूरत हो गई, चिल्ला कर रोने और बकने लगे – ‘हाय चंद्रकांता, तुझे कौन ले गया? नहीं, ले नहीं बल्कि मार गया। जरूर इन्हीं भेड़ियों ने तुझे मुझसे


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पूरी उम्मीद थी कि कुमारी चंद्रकांता और चपला को यहाँ देखेंगे, मगर वे कहीं नजर न आईं, हाँ जमीन पर पड़ी दो लाशें जरूर दिखाई दीं जिनमें मांस बहुत कम था, सिर से पैर तक नुची हड्डियाँ दिखाई देती थीं, चेहरे किसी के भी दुरुस्त न थे।

इस वक्त कुमार की कैसी दशा थी वे ही जानते होंगे। पागलों की-सी सूरत हो गई, चिल्ला कर रोने और बकने लगे – ‘हाय चंद्रकांता, तुझे कौन ले गया? नहीं, ले नहीं बल्कि मार गया। जरूर इन्हीं भेड़ियों ने तुझे मुझसे


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