ही नहीं था बल्कि बातचीत भी की थी। आज उन दोनों की जगह इन दो लाशों को देखने से मालूम हुआ कि वे दोनों…(इतना कहना था कि गला भर आया)
योगी : (तेज़सिंह की तरफ देखकर) क्या तुम्हारी अक्ल भी घास चरने चली गई? इन लाशों को देखकर इतना न पहचान सके कि ये मर्दो की लाशें है या औरतों की? इसकी लम्बाई और बनावट पर भी कुछ खयाल न किया?
तेज़सिंह : (घबरा कर दोनों लाशों की तरफ गौर से देखकर शर्माकर) मुझसे बड़ी भूल हुई कि मैंने इन दोनों लाशों की तरफ गौर नहीं किया,
ही नहीं था बल्कि बातचीत भी की थी। आज उन दोनों की जगह इन दो लाशों को देखने से मालूम हुआ कि वे दोनों…(इतना कहना था कि गला भर आया)
योगी : (तेज़सिंह की तरफ देखकर) क्या तुम्हारी अक्ल भी घास चरने चली गई? इन लाशों को देखकर इतना न पहचान सके कि ये मर्दो की लाशें है या औरतों की? इसकी लम्बाई और बनावट पर भी कुछ खयाल न किया?
तेज़सिंह : (घबरा कर दोनों लाशों की तरफ गौर से देखकर शर्माकर) मुझसे बड़ी भूल हुई कि मैंने इन दोनों लाशों की तरफ गौर नहीं किया,