है वही कुमारी चन्द्रकान्ता को भी ले गया होगा। इस सोच और तरद्दुद में डूबा हुआ मैं एकटक उस दरवाज़े की तरफ देखता रह गया और योगी महाराज चलते बने।
तेज़सिंह की इतनी बात सुनकर बड़ी देर तक कुमार चुप बैठे रहे, बदहवासी सी आ गयी, इसके बाद सम्हल कर बैठे और बोले–
कुमार : तो कुमारी चन्द्रकान्ता फिर एक नयी बला में फँस गयी?
तेज़सिंह : मालूम तो ऐसा ही पड़ता है।
कुमार : तब इसका पता कैसे लगे? अब क्या करना चाहिए?
तेज़सिंह : पहले तो
है वही कुमारी चन्द्रकान्ता को भी ले गया होगा। इस सोच और तरद्दुद में डूबा हुआ मैं एकटक उस दरवाज़े की तरफ देखता रह गया और योगी महाराज चलते बने।
तेज़सिंह की इतनी बात सुनकर बड़ी देर तक कुमार चुप बैठे रहे, बदहवासी सी आ गयी, इसके बाद सम्हल कर बैठे और बोले–
कुमार : तो कुमारी चन्द्रकान्ता फिर एक नयी बला में फँस गयी?
तेज़सिंह : मालूम तो ऐसा ही पड़ता है।
कुमार : तब इसका पता कैसे लगे? अब क्या करना चाहिए?
तेज़सिंह : पहले तो