हम लोगों को उस खोह में चलना चाहिए। वहां चलकर उस तिलिस्म को देखें जिसे तोड़ कर कोई दूसरा वह खज़ाना ले गया है, शायद वहां कुछ मिले या कोई निशान पाया जाये, इसके बाद जो कुछ सलाह होगी किया जायेगा।
कुमार : अच्छा चलो, मगर इस वक़्त एक बात का खयाल और मेरे जी में आता है।
तेज़सिंह : वह क्या?
कुमार : जब बद्रीनाथ को क़ैद करने उस खोह में गये थे और दरवाज़ा न खुलने पर वापस आये, उस वक़्त भी शायद उस दरवाज़े को भीतर से उसी ने बन्द कर
हम लोगों को उस खोह में चलना चाहिए। वहां चलकर उस तिलिस्म को देखें जिसे तोड़ कर कोई दूसरा वह खज़ाना ले गया है, शायद वहां कुछ मिले या कोई निशान पाया जाये, इसके बाद जो कुछ सलाह होगी किया जायेगा।
कुमार : अच्छा चलो, मगर इस वक़्त एक बात का खयाल और मेरे जी में आता है।
तेज़सिंह : वह क्या?
कुमार : जब बद्रीनाथ को क़ैद करने उस खोह में गये थे और दरवाज़ा न खुलने पर वापस आये, उस वक़्त भी शायद उस दरवाज़े को भीतर से उसी ने बन्द कर