लिया हो जिसने उस तिलिस्म को तोड़ा है। वह उस वक़्त उसके अन्दर रहा होगा।
तेज़सिंह : आपका खयाल ठीक है, ज़रूर यही बात है, इसमें कोई शक नहीं। बल्कि उसी ने शिवदत्त को भी छुड़ाया होगा।
कुमार : हो सकता है, मगर जब छूटने पर शिवदत्त ने बेईमानी पर कमर बांधी और पीछे मेरे लश्कर पर धावा मारा तो क्या उसी ने फिर शिवदत्त को गिरफ्तार करके उसके खोह में डाल दिया? और क्या वह पुर्जा भी उसी का लिखा था जो शिवदत्त के गायब होने के बाद उसके पलंग पर मिला था?
लिया हो जिसने उस तिलिस्म को तोड़ा है। वह उस वक़्त उसके अन्दर रहा होगा।
तेज़सिंह : आपका खयाल ठीक है, ज़रूर यही बात है, इसमें कोई शक नहीं। बल्कि उसी ने शिवदत्त को भी छुड़ाया होगा।
कुमार : हो सकता है, मगर जब छूटने पर शिवदत्त ने बेईमानी पर कमर बांधी और पीछे मेरे लश्कर पर धावा मारा तो क्या उसी ने फिर शिवदत्त को गिरफ्तार करके उसके खोह में डाल दिया? और क्या वह पुर्जा भी उसी का लिखा था जो शिवदत्त के गायब होने के बाद उसके पलंग पर मिला था?