बल्कि उसने तो कहा था कि हम शिवदत्त को बराबर इसी खोह में देखते हैं, न उसने और कोई खौफ की बात बतायी।
कुमार : मामला तो बहुत ही पेंचीदा मालूम पड़ता है, मगर तुम भी कुछ गलती कर गये।
तेज़सिंह : मैंने क्या गलती की?
कुमार : कल योगी ने दीवार से निकलकर मुझे कूदने से रोका, इसके बाद ज़मीन पर लात मारी और वहां की ज़मीन फट गई और वनकन्या निकल आई, तो योगी कोई देवता तो थे नहीं कि लात मार के ज़मीन फाड़ डालते। ज़रूर वहां की ज़मीन के अन्दर
बल्कि उसने तो कहा था कि हम शिवदत्त को बराबर इसी खोह में देखते हैं, न उसने और कोई खौफ की बात बतायी।
कुमार : मामला तो बहुत ही पेंचीदा मालूम पड़ता है, मगर तुम भी कुछ गलती कर गये।
तेज़सिंह : मैंने क्या गलती की?
कुमार : कल योगी ने दीवार से निकलकर मुझे कूदने से रोका, इसके बाद ज़मीन पर लात मारी और वहां की ज़मीन फट गई और वनकन्या निकल आई, तो योगी कोई देवता तो थे नहीं कि लात मार के ज़मीन फाड़ डालते। ज़रूर वहां की ज़मीन के अन्दर