चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

कोई रहस्य है। तुम्हें भी मुनासिब था कि उसी तरह लात मारके देखते कि ज़मीन फटती है या नहीं।

तेज़सिंह : ठीक है। चलिये।

आज फिर कुमार और तीनों ऐयार उस तिलिस्म में गये। मामूली राह से घूमते हुए उसी दलान में पहुंचे जहां योगी निकले थे। जाकर देखा तो वे दोनों सड़ी और जानवरों की खाई हुई लाशें वहां न थीं, ज़मीन धोई साफ मालूम पड़ती थी। थोड़ी देर तक ताज्जुब से भरे ये लोग खड़े रहे, इसके बाद तेज़सिंह ने गौर करके उसी जगह ज़ोर से लात मारी जहां योगी ने लात मारी थी।


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कोई रहस्य है। तुम्हें भी मुनासिब था कि उसी तरह लात मारके देखते कि ज़मीन फटती है या नहीं।

तेज़सिंह : ठीक है। चलिये।

आज फिर कुमार और तीनों ऐयार उस तिलिस्म में गये। मामूली राह से घूमते हुए उसी दलान में पहुंचे जहां योगी निकले थे। जाकर देखा तो वे दोनों सड़ी और जानवरों की खाई हुई लाशें वहां न थीं, ज़मीन धोई साफ मालूम पड़ती थी। थोड़ी देर तक ताज्जुब से भरे ये लोग खड़े रहे, इसके बाद तेज़सिंह ने गौर करके उसी जगह ज़ोर से लात मारी जहां योगी ने लात मारी थी।


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