खिलायें! मैंने कुछ किया उसको आप माफ करें। मुझे राज्य की बिलकुल अभिलाषा नहीं है। चुनार को आपने जिस तरह फतह किया और वहां जो कुछ हुआ मुझे मालूम है। मैं अब सिर्फ एक बात चाहता हूँ, परमेश्वर के लिए तथा अपनी जवांमर्दी और बहादुरी की तरफ खयाल करके मेरी इच्छा पूरी कीजिए। इतना कह हाथ जोड़ कर सामने खड़े हो गये।
राजा सुरेन्द्रसिंह : जो कुछ आपके जी में हो कहिये जहां तक हो सकेगा मैं उसको पूरा करूंगा।
शिवदत्त : जो कुछ मैं कहता हूं
खिलायें! मैंने कुछ किया उसको आप माफ करें। मुझे राज्य की बिलकुल अभिलाषा नहीं है। चुनार को आपने जिस तरह फतह किया और वहां जो कुछ हुआ मुझे मालूम है। मैं अब सिर्फ एक बात चाहता हूँ, परमेश्वर के लिए तथा अपनी जवांमर्दी और बहादुरी की तरफ खयाल करके मेरी इच्छा पूरी कीजिए। इतना कह हाथ जोड़ कर सामने खड़े हो गये।
राजा सुरेन्द्रसिंह : जो कुछ आपके जी में हो कहिये जहां तक हो सकेगा मैं उसको पूरा करूंगा।
शिवदत्त : जो कुछ मैं कहता हूं