चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

धोखा दिया, लड़ाई ठानी मगर अभी तक परमेश्वर ने हम लोगों की रक्षा की। क्रूरसिंह, नाज़िम और अहमद भी अपनी सजा को पहुंच गये और हम लोगों की बुराई सोचते-सोचते ही मर गये। अब आपका क्या इरादा है? इसी तरह क़ैद में पड़े रहना मंजूर है या और कुछ सोचा है?’’

महाराज शिवदत्त ने कहा, ‘‘आपकी और कुंवर वीरेन्द्रसिंह की बहादुरी में कोई शक नहीं, जहां तक तारीफ की जाये थोड़ी है। परमेश्वर आपको खुश रखे और पोते का मुख दिखाये। उसे गोद में लेकर आप


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धोखा दिया, लड़ाई ठानी मगर अभी तक परमेश्वर ने हम लोगों की रक्षा की। क्रूरसिंह, नाज़िम और अहमद भी अपनी सजा को पहुंच गये और हम लोगों की बुराई सोचते-सोचते ही मर गये। अब आपका क्या इरादा है? इसी तरह क़ैद में पड़े रहना मंजूर है या और कुछ सोचा है?’’

महाराज शिवदत्त ने कहा, ‘‘आपकी और कुंवर वीरेन्द्रसिंह की बहादुरी में कोई शक नहीं, जहां तक तारीफ की जाये थोड़ी है। परमेश्वर आपको खुश रखे और पोते का मुख दिखाये। उसे गोद में लेकर आप


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