चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

मरने के वक़्त अपनी सारी जमा पूँजी और चपला को महाराज के सुपुर्द कर गया। क्योंकि उसका कोई वारिस नहीं था। महाराज जयसिंह इसको लड़की की तरह मानते हैं और महारानी भी इसे बहुत चाहती हैं। कुमारी चन्द्रकान्ता का और उसका लड़कपन ही से साथ होने के सबब से दोनों में मुहब्बत है।

तेज़सिंह : आज तो आपने बड़ी खुशी की बात सुनाई बहुत दिनों से इसका खटका लगा था पर कई बातों को सोचकर आपसे नहीं पूछा। भला यह बातें आपको मालूम कैसे हुईं?

कुमार : खास चन्द्रकान्ता की जुबानी।


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मरने के वक़्त अपनी सारी जमा पूँजी और चपला को महाराज के सुपुर्द कर गया। क्योंकि उसका कोई वारिस नहीं था। महाराज जयसिंह इसको लड़की की तरह मानते हैं और महारानी भी इसे बहुत चाहती हैं। कुमारी चन्द्रकान्ता का और उसका लड़कपन ही से साथ होने के सबब से दोनों में मुहब्बत है।

तेज़सिंह : आज तो आपने बड़ी खुशी की बात सुनाई बहुत दिनों से इसका खटका लगा था पर कई बातों को सोचकर आपसे नहीं पूछा। भला यह बातें आपको मालूम कैसे हुईं?

कुमार : खास चन्द्रकान्ता की जुबानी।


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