तेज़सिंह : तब तो बहुत ठीक है।
तमाम रात बातचीत में गुज़र गई, किसी को नींद न आई। सवेरे ही उठ कर ज़रूरी कामों से छुट्टी पा उसी चश्में में नहाकर संध्या-पूजा की और कुछ मेवा खा जिस राह से उस बाग में गये थे उसी राह से लौट आये और चौथी खिड़की के अन्दर क्या है देखने के लिए उसमें घुसे। उसमें भी जाकर हरा-भरा बाग देखा जिसे देखते ही कुमार चौंक पड़े।
चन्द्रकान्ता ( चौथा भाग : छठवां बयान)
तेजसिंह ने कुँवर वीरेंद्रसिंह से पूछा – ‘आप
तेज़सिंह : तब तो बहुत ठीक है।
तमाम रात बातचीत में गुज़र गई, किसी को नींद न आई। सवेरे ही उठ कर ज़रूरी कामों से छुट्टी पा उसी चश्में में नहाकर संध्या-पूजा की और कुछ मेवा खा जिस राह से उस बाग में गये थे उसी राह से लौट आये और चौथी खिड़की के अन्दर क्या है देखने के लिए उसमें घुसे। उसमें भी जाकर हरा-भरा बाग देखा जिसे देखते ही कुमार चौंक पड़े।
चन्द्रकान्ता ( चौथा भाग : छठवां बयान)
तेजसिंह ने कुँवर वीरेंद्रसिंह से पूछा – ‘आप