गोदान - Godan



होरी ने दातादीन से कहा - तुम्हारी चाकरी से मैं कब इनकार करता हूँ महाराज? लेकिन हमारी ऊख भी तो बोने को पड़ी है।

गोबर ने बाप को डाँटा - कैसी चाकरी और किसकी चाकरी? यहाँ कोई किसी का चाकर नहीं। सभी बराबर हैं। अच्छी दिल्लगी है। किसी को सौ रुपए उधार दे दिए और उससे सूद में जिंदगी भर काम लेते रहे। मूल ज्यों का त्यों! यह महाजनी नहीं है, खून चूसना है।

'तो रुपए दे दो भैया, लड़ाई काहे की, मैं आने रुपए ब्याज लेता हूँ, तुम्हें गाँव-घर का समझ कर आधा आने रुपए पर दिया था।'


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होरी ने दातादीन से कहा - तुम्हारी चाकरी से मैं कब इनकार करता हूँ महाराज? लेकिन हमारी ऊख भी तो बोने को पड़ी है।

गोबर ने बाप को डाँटा - कैसी चाकरी और किसकी चाकरी? यहाँ कोई किसी का चाकर नहीं। सभी बराबर हैं। अच्छी दिल्लगी है। किसी को सौ रुपए उधार दे दिए और उससे सूद में जिंदगी भर काम लेते रहे। मूल ज्यों का त्यों! यह महाजनी नहीं है, खून चूसना है।

'तो रुपए दे दो भैया, लड़ाई काहे की, मैं आने रुपए ब्याज लेता हूँ, तुम्हें गाँव-घर का समझ कर आधा आने रुपए पर दिया था।'


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