पाँव में एक बार ठोकर लग जाने के बाद किसी कारण से बार-बार ठोकर लगती है और कभी-कभी अँगूठा पक जाता है और महीनों कष्ट देता है। पिता और पुत्र के सदभाव को आज उसी तरह की चोट लग गई थी और उस पर यह तीसरी चोट पड़ी।
गोबर ने घर जा कर झुनिया को खेत में पानी देने के लिए साथ लिया। झुनिया बच्चे को ले कर खेत में आ गई। धनिया और उसकी दोनों बेटियाँ बैठी ताकती रहीं। माँ को भी गोबर की यह उद्दंडता बुरी लगती थी। रूपा को मारता तो वह बुरा न मानती,
पाँव में एक बार ठोकर लग जाने के बाद किसी कारण से बार-बार ठोकर लगती है और कभी-कभी अँगूठा पक जाता है और महीनों कष्ट देता है। पिता और पुत्र के सदभाव को आज उसी तरह की चोट लग गई थी और उस पर यह तीसरी चोट पड़ी।
गोबर ने घर जा कर झुनिया को खेत में पानी देने के लिए साथ लिया। झुनिया बच्चे को ले कर खेत में आ गई। धनिया और उसकी दोनों बेटियाँ बैठी ताकती रहीं। माँ को भी गोबर की यह उद्दंडता बुरी लगती थी। रूपा को मारता तो वह बुरा न मानती,