मगर जवान लड़की को मारना, यह उसके लिए असहाय था।
आज ही रात को गोबर ने लखनऊ लौट जाने का निश्चय कर लिया। यहाँ अब वह नहीं रह सकता। जब घर में उसकी कोई पूछ नहीं है, तो वह क्यों रहे। वह लेन-देन के मामले में बोल नहीं सकता। लड़कियों को जरा मार दिया तो लोग ऐसे जामे के बाहर हो गए, मानो वह बाहर का आदमी है। तो इस सराय में वह न रहेगा।
दोनों भोजन करके बाहर आए थे कि नोखेराम के प्यादे ने आ कर कहा - चलो, कारिंदा साहब ने बुलाया है।
मगर जवान लड़की को मारना, यह उसके लिए असहाय था।
आज ही रात को गोबर ने लखनऊ लौट जाने का निश्चय कर लिया। यहाँ अब वह नहीं रह सकता। जब घर में उसकी कोई पूछ नहीं है, तो वह क्यों रहे। वह लेन-देन के मामले में बोल नहीं सकता। लड़कियों को जरा मार दिया तो लोग ऐसे जामे के बाहर हो गए, मानो वह बाहर का आदमी है। तो इस सराय में वह न रहेगा।
दोनों भोजन करके बाहर आए थे कि नोखेराम के प्यादे ने आ कर कहा - चलो, कारिंदा साहब ने बुलाया है।