गोदान - Godan



धनिया भी खाना खा कर बाहर निकल आई थी। बोली - अभी क्यों जाते हो बेटा, दो-चार दिन और रह कर ऊख की बोनी करा लो और कुछ लेन-देन का हिसाब भी ठीक कर लो, तो जाना।

गोबर ने शान जमाते हुए कहा - मेरा दो-तीन रुपए रोज का घाटा हो रहा है, यह भी समझती हो। यहाँ मैं बहुत-बहुत दो-चार आने की मजूरी ही तो करता हूँ और अबकी मैं झुनिया को भी लेता जाऊँगा। वहाँ मुझे खाने-पीने की बड़ी तकलीफ होती है।

धनिया ने डरते-डरते कहा - जैसे तुम्हारी इच्छा,


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धनिया भी खाना खा कर बाहर निकल आई थी। बोली - अभी क्यों जाते हो बेटा, दो-चार दिन और रह कर ऊख की बोनी करा लो और कुछ लेन-देन का हिसाब भी ठीक कर लो, तो जाना।

गोबर ने शान जमाते हुए कहा - मेरा दो-तीन रुपए रोज का घाटा हो रहा है, यह भी समझती हो। यहाँ मैं बहुत-बहुत दो-चार आने की मजूरी ही तो करता हूँ और अबकी मैं झुनिया को भी लेता जाऊँगा। वहाँ मुझे खाने-पीने की बड़ी तकलीफ होती है।

धनिया ने डरते-डरते कहा - जैसे तुम्हारी इच्छा,


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