लेकिन वहाँ वह कैसे अकेले घर सँभालेगी, कैसे बच्चे की देखभाल करेगी?'
'अब बच्चे को देखूँ कि अपना सुभीता देखूँ, मुझसे चूल्हा नहीं फूँका जाता।
'ले जाने को मैं नहीं रोकती, लेकिन परदेस में बाल-बच्चों के साथ रहना, न कोई आगे न पीछे, सोचो कितना झंझट है।'
'परदेस में संगी-साथी निकल ही आते हैं अम्माँ, और यह तो स्वारथ का संसार है। जिसके साथ चार पैसे का गम खाओ, वही अपना। खाली हाथ तो माँ-बाप भी नहीं पूछते।'
धनिया कटाक्ष समझ गई।
लेकिन वहाँ वह कैसे अकेले घर सँभालेगी, कैसे बच्चे की देखभाल करेगी?'
'अब बच्चे को देखूँ कि अपना सुभीता देखूँ, मुझसे चूल्हा नहीं फूँका जाता।
'ले जाने को मैं नहीं रोकती, लेकिन परदेस में बाल-बच्चों के साथ रहना, न कोई आगे न पीछे, सोचो कितना झंझट है।'
'परदेस में संगी-साथी निकल ही आते हैं अम्माँ, और यह तो स्वारथ का संसार है। जिसके साथ चार पैसे का गम खाओ, वही अपना। खाली हाथ तो माँ-बाप भी नहीं पूछते।'
धनिया कटाक्ष समझ गई।