को भी दया आ गई। सिलिया को वहीं छोड़ कर सब-के-सब चले गए। तब वह धीरे-से उठ कर लँगड़ाती, कराहती, खलिहान में आ कर बैठ गई और अंचल में मुँह ढाँप कर रोने लगी। दातादीन ने जुलाहे का गुस्सा डाढ़ी पर उतारा - उनके साथ चली क्यों न गई सिलिया! अब क्या करवाने पर लगी हुई है? मेरा सत्यानास कराके भी न पेट नहीं भरा?
सिलिया ने आँसू-भरी आँखें ऊपर उठाईं। उनमें तेज की झलक थी।
'उनके साथ क्यों जाऊँ? जिसने बाँह पकड़ी है, उसके साथ रहूँगी।'
को भी दया आ गई। सिलिया को वहीं छोड़ कर सब-के-सब चले गए। तब वह धीरे-से उठ कर लँगड़ाती, कराहती, खलिहान में आ कर बैठ गई और अंचल में मुँह ढाँप कर रोने लगी। दातादीन ने जुलाहे का गुस्सा डाढ़ी पर उतारा - उनके साथ चली क्यों न गई सिलिया! अब क्या करवाने पर लगी हुई है? मेरा सत्यानास कराके भी न पेट नहीं भरा?
सिलिया ने आँसू-भरी आँखें ऊपर उठाईं। उनमें तेज की झलक थी।
'उनके साथ क्यों जाऊँ? जिसने बाँह पकड़ी है, उसके साथ रहूँगी।'