गोदान - Godan


पंडितजी ने धमकी दी - मेरे घर में पाँव रखा, तो लातों से बात करूँगा।

सिलिया ने उद्दंडता से कहा - मुझे जहाँ वह रखेंगे, वहाँ रहूँगी। पेड़ तले रखें, चाहे महल में रखें।

मातादीन संज्ञाहीन-सा बैठा था। दोपहर होने को आ रहा था। धूप पत्तियों से छन-छन कर उसके चेहरे पर पड़ रही थी। माथे से पसीना टपक रहा था। पर वह मौन, निस्पंद बैठा हुआ था।

सहसा जैसे उसने होश में आ कर कहा - मेरे लिए अब क्या कहते हो दादा?

दातादीन ने उसके सिर पर


1200 of 1753


पंडितजी ने धमकी दी - मेरे घर में पाँव रखा, तो लातों से बात करूँगा।

सिलिया ने उद्दंडता से कहा - मुझे जहाँ वह रखेंगे, वहाँ रहूँगी। पेड़ तले रखें, चाहे महल में रखें।

मातादीन संज्ञाहीन-सा बैठा था। दोपहर होने को आ रहा था। धूप पत्तियों से छन-छन कर उसके चेहरे पर पड़ रही थी। माथे से पसीना टपक रहा था। पर वह मौन, निस्पंद बैठा हुआ था।

सहसा जैसे उसने होश में आ कर कहा - मेरे लिए अब क्या कहते हो दादा?

दातादीन ने उसके सिर पर


1200 of 1753