हाथ रख कर ढाँड़स देते हुए कहा - तुम्हारे लिए अभी मैं क्या कहूँ बेटा? चल कर नहाओ, खाओ, फिर पंडितों की जैसी व्यवस्था होगी, वैसा किया जायगा। हाँ, एक बात है, सिलिया को त्यागना पड़ेगा।
मातादीन ने सिलिया की ओर रक्त-भरे नेत्रों से देखा - मैं अब उसका कभी मुँह न देखूँगा, लेकिन परासचित हो जाने पर फिर तो कोई दोस न रहेगा?
'परासचित हो जाने पर कोई दोस-पाप नहीं रहता।'
'तो आज ही पंडितों के पास जाओ।'
'आज ही जाऊँगा बेटा!'
'लेकिन पंडित लोग कहें कि इसका परासचित नहीं हो सकता,
हाथ रख कर ढाँड़स देते हुए कहा - तुम्हारे लिए अभी मैं क्या कहूँ बेटा? चल कर नहाओ, खाओ, फिर पंडितों की जैसी व्यवस्था होगी, वैसा किया जायगा। हाँ, एक बात है, सिलिया को त्यागना पड़ेगा।
मातादीन ने सिलिया की ओर रक्त-भरे नेत्रों से देखा - मैं अब उसका कभी मुँह न देखूँगा, लेकिन परासचित हो जाने पर फिर तो कोई दोस न रहेगा?
'परासचित हो जाने पर कोई दोस-पाप नहीं रहता।'
'तो आज ही पंडितों के पास जाओ।'
'आज ही जाऊँगा बेटा!'
'लेकिन पंडित लोग कहें कि इसका परासचित नहीं हो सकता,