सिलिया ने धृष्टता के साथ उसका हाथ पकड़ कर कहा - वास्ता कैसे नहीं है? इसी गाँव में तुमसे धनी, तुमसे सुंदर, तुमसे इज्जतदार लोग हैं। मैं उनका हाथ क्यों नहीं पकड़ती? तुम्हारी यह दुरदसा ही आज क्यों हुई? जो रस्सी तुम्हारे गले पड़ गई है, उसे तुम लाख चाहो, नहीं तोड़ सकते। और न मैं तुम्हें छोड़ कर कहीं जाऊँगी। मजूरी करूँगी, भीख माँगूँगी, लेकिन तुम्हें न छोडूँगी।
यह कहते हुए उसने मातादीन का हाथ छोड़ दिया और फिर खलिहान में जा
सिलिया ने धृष्टता के साथ उसका हाथ पकड़ कर कहा - वास्ता कैसे नहीं है? इसी गाँव में तुमसे धनी, तुमसे सुंदर, तुमसे इज्जतदार लोग हैं। मैं उनका हाथ क्यों नहीं पकड़ती? तुम्हारी यह दुरदसा ही आज क्यों हुई? जो रस्सी तुम्हारे गले पड़ गई है, उसे तुम लाख चाहो, नहीं तोड़ सकते। और न मैं तुम्हें छोड़ कर कहीं जाऊँगी। मजूरी करूँगी, भीख माँगूँगी, लेकिन तुम्हें न छोडूँगी।
यह कहते हुए उसने मातादीन का हाथ छोड़ दिया और फिर खलिहान में जा