गोदान - Godan

कर अनाज ओसाने लगी। होरी अभी तक वहाँ अनाज माँड़ रहा था। धनिया उसे भोजन करने के लिए बुलाने आई थी। होरी ने बैलों को पैरे से बाहर निकाल कर एक पेड़ में बाँध दिया और सिलिया से बोला - तू भी जा, खा-पी आ सिलिया! धनिया यहाँ बैठी है। तेरी पीठ पर की साड़ी तो लहू से रंग गई है रे! कहीं घाव पक न जाए। तेरे घर वाले बड़े निरदयी हैं।

सिलिया ने उसकी ओर करुण नेत्रों से देखा - यहाँ निरदयी कौन नहीं है, दादा! मैंने तो किसी को दयावान नहीं पाया।


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कर अनाज ओसाने लगी। होरी अभी तक वहाँ अनाज माँड़ रहा था। धनिया उसे भोजन करने के लिए बुलाने आई थी। होरी ने बैलों को पैरे से बाहर निकाल कर एक पेड़ में बाँध दिया और सिलिया से बोला - तू भी जा, खा-पी आ सिलिया! धनिया यहाँ बैठी है। तेरी पीठ पर की साड़ी तो लहू से रंग गई है रे! कहीं घाव पक न जाए। तेरे घर वाले बड़े निरदयी हैं।

सिलिया ने उसकी ओर करुण नेत्रों से देखा - यहाँ निरदयी कौन नहीं है, दादा! मैंने तो किसी को दयावान नहीं पाया।


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