मुँह में कालिख लगे तो हम क्या करेंगे!
सहसा नोहरी चुँदरी पहने सामने से जाती हुई दिखाई दी। होरी को देखते ही उसने जरा-सा घूँघट-सा निकाल लिया। उससे समधी का नाता मानती थी।
धनिया से उसका परिचय हो चुका था। उसने पुकारा - आज किधर चलीं समधिन? आओ, बैठो।
नोहरी ने दिग्विजय कर लिया था और अब जनमत को अपने पक्ष में बटोर लेने का प्रयास कर रही थी। आ कर खड़ी हो गई।
धनिया ने उसे सिर से पाँव तक आलोचना की आँखों से देख कर कहा - आज इधर कैसे भूल पड़ीं?
मुँह में कालिख लगे तो हम क्या करेंगे!
सहसा नोहरी चुँदरी पहने सामने से जाती हुई दिखाई दी। होरी को देखते ही उसने जरा-सा घूँघट-सा निकाल लिया। उससे समधी का नाता मानती थी।
धनिया से उसका परिचय हो चुका था। उसने पुकारा - आज किधर चलीं समधिन? आओ, बैठो।
नोहरी ने दिग्विजय कर लिया था और अब जनमत को अपने पक्ष में बटोर लेने का प्रयास कर रही थी। आ कर खड़ी हो गई।
धनिया ने उसे सिर से पाँव तक आलोचना की आँखों से देख कर कहा - आज इधर कैसे भूल पड़ीं?