गोदान - Godan

इस व्यंग्य का आनंद ले कर मेहता की ओर आँखें मारते हुए कहा - पुरुष तो आपके लिए इतने सम्मान की वस्तु न थी।

मालती झेंपी नहीं। इस संकेत का आशय समझ कर जोश-भरे स्वर में बोली - लेकिन अब हो गई हूँ, इसलिए कि मैंने पुरुष का जो रूप अपने परिचितों की परिधि में देखा था, उससे यह कहीं सुंदर है। पुरुष इतना सुंदर, इतना कोमल हृदय....

मेहता ने मालती की ओर दीन-भाव से देखा और बोले - नहीं मालती, मुझ पर दया करो, नहीं मैं यहाँ से भाग जाऊँगा।


1384 of 1753

इस व्यंग्य का आनंद ले कर मेहता की ओर आँखें मारते हुए कहा - पुरुष तो आपके लिए इतने सम्मान की वस्तु न थी।

मालती झेंपी नहीं। इस संकेत का आशय समझ कर जोश-भरे स्वर में बोली - लेकिन अब हो गई हूँ, इसलिए कि मैंने पुरुष का जो रूप अपने परिचितों की परिधि में देखा था, उससे यह कहीं सुंदर है। पुरुष इतना सुंदर, इतना कोमल हृदय....

मेहता ने मालती की ओर दीन-भाव से देखा और बोले - नहीं मालती, मुझ पर दया करो, नहीं मैं यहाँ से भाग जाऊँगा।


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