कहा - यह क्या करते हैं आप - ख्वाहमख्वाह उसे छेड़ रहे हैं,। कहीं लौट पड़े तो?
'लौट क्या पड़ेगा, वहीं ढेर हो जायगा।'
'तो मुझे उस टीले पर चढ़ जाने दीजिए। मैं शिकार का ऐसा शौकीन नहीं हूँ।'
'तब क्या शिकार खेलने चले थे?'
'शामत और क्या!'
रायसाहब ने बंदूक नीचे कर ली।
'बड़ा अच्छा शिकार निकल गया। ऐसे अवसर कम मिलते हैं।'
'मैं तो अब यहाँ नहीं ठहर सकता। खतरनाक जगह है।'
'एकाध शिकार तो मार लेने दीजिए। खाली हाथ लौटते शर्म आती है।'
कहा - यह क्या करते हैं आप - ख्वाहमख्वाह उसे छेड़ रहे हैं,। कहीं लौट पड़े तो?
'लौट क्या पड़ेगा, वहीं ढेर हो जायगा।'
'तो मुझे उस टीले पर चढ़ जाने दीजिए। मैं शिकार का ऐसा शौकीन नहीं हूँ।'
'तब क्या शिकार खेलने चले थे?'
'शामत और क्या!'
रायसाहब ने बंदूक नीचे कर ली।
'बड़ा अच्छा शिकार निकल गया। ऐसे अवसर कम मिलते हैं।'
'मैं तो अब यहाँ नहीं ठहर सकता। खतरनाक जगह है।'
'एकाध शिकार तो मार लेने दीजिए। खाली हाथ लौटते शर्म आती है।'