कुछ नहीं जानता। हाथ पकड़ कर घसीट लाऊँगा और गाँव के बाहर कर दूँगा। बात तो एक दिन खुलनी ही है, फिर आज ही क्यों न खुल जाय? वह मेरे घर आई क्यों? जाय जहाँ गोबर है। उसके साथ कुकरम किया, तो क्या हमसे पूछ कर किया था?
धनिया ने फिर उसका हाथ पकड़ा और धीरे-से बोली - तुम उसका हाथ पकड़ोगे तो वह चिल्लाएगी।
'तो चिल्लाया करे।'
'मुदा इतनी रात गए, अँधेरे सन्नाटे रात में जायगी कहाँ, यह तो सोचो।'
'जाय जहाँ उसके सगे हों। हमारे घर में उसका क्या रखा है?'
कुछ नहीं जानता। हाथ पकड़ कर घसीट लाऊँगा और गाँव के बाहर कर दूँगा। बात तो एक दिन खुलनी ही है, फिर आज ही क्यों न खुल जाय? वह मेरे घर आई क्यों? जाय जहाँ गोबर है। उसके साथ कुकरम किया, तो क्या हमसे पूछ कर किया था?
धनिया ने फिर उसका हाथ पकड़ा और धीरे-से बोली - तुम उसका हाथ पकड़ोगे तो वह चिल्लाएगी।
'तो चिल्लाया करे।'
'मुदा इतनी रात गए, अँधेरे सन्नाटे रात में जायगी कहाँ, यह तो सोचो।'
'जाय जहाँ उसके सगे हों। हमारे घर में उसका क्या रखा है?'