प्रतिज्ञा - Pratigya

से दो प्रेमियों को वियोगाग्नि में जलते देख सकती थी? कदापि नहीं। इसके पहले भी कई बार उसके जी में आया था कि कमलाप्रसाद को समझा-बुझा कर शांत कर दे, लेकिन कितनी ही शंकाएँ उसका रास्ता रोक कर खड़ी हो गई थी। आज करूणा ने उन शंकाओं का शमन कर दिया। वह कमलाप्रसाद को मनाने चली। उसके मन में किसी प्रकार का संदेह न था। कमलाप्रसाद को वह शुरू से ही अपना बड़ा भाई समझती आ रही थी, भैया कह कर पुकारती भी थी। फिर उसे उनके कमरे में जाने की जरूरत


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से दो प्रेमियों को वियोगाग्नि में जलते देख सकती थी? कदापि नहीं। इसके पहले भी कई बार उसके जी में आया था कि कमलाप्रसाद को समझा-बुझा कर शांत कर दे, लेकिन कितनी ही शंकाएँ उसका रास्ता रोक कर खड़ी हो गई थी। आज करूणा ने उन शंकाओं का शमन कर दिया। वह कमलाप्रसाद को मनाने चली। उसके मन में किसी प्रकार का संदेह न था। कमलाप्रसाद को वह शुरू से ही अपना बड़ा भाई समझती आ रही थी, भैया कह कर पुकारती भी थी। फिर उसे उनके कमरे में जाने की जरूरत


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