ही क्या थी? वह कमरे के द्वार पर खड़ी हो कर उन्हें पुकारेगी, और कहेगी - भाभी को ज्वर हो आया है, आप जरा अंदर चले आइए। बस, यह खबर पाते ही कमलाप्रसाद दौड़े अंदर चले जाएँगे, इसमें उसे लेशमात्र भी संदेह नहीं था। तीन साल के वैवाहिक जीवन का अनुभव होने पर भी पुरुष-संसार से अनभिज्ञ थी। अपने मामा के छोटे-से गाँव में उसका बाल-जीवन बीता था। वहाँ सारा गाँव उसे बहन या बेटी कहता था। उस कुत्सित वासनाओं से रहित संसार में वह स्वछंद रूप से खेत,
ही क्या थी? वह कमरे के द्वार पर खड़ी हो कर उन्हें पुकारेगी, और कहेगी - भाभी को ज्वर हो आया है, आप जरा अंदर चले आइए। बस, यह खबर पाते ही कमलाप्रसाद दौड़े अंदर चले जाएँगे, इसमें उसे लेशमात्र भी संदेह नहीं था। तीन साल के वैवाहिक जीवन का अनुभव होने पर भी पुरुष-संसार से अनभिज्ञ थी। अपने मामा के छोटे-से गाँव में उसका बाल-जीवन बीता था। वहाँ सारा गाँव उसे बहन या बेटी कहता था। उस कुत्सित वासनाओं से रहित संसार में वह स्वछंद रूप से खेत,