प्रतिज्ञा - Pratigya

नहीं तो वह कभी यह इरादा न करते। मैं ऐसे सज्जन प्राणी का उत्साह बढ़ाना अपना धर्म समझती हूँ। उसे गृहस्थी में नहीं फँसाना चाहती।'

प्रेमा - 'तो फिर उन्हें भी होगा।'

प्रेमा - 'तो मैं भी अपना हृदय कठोर बना लूँगी।'

प्रेमा ने हारमोनियम सँभाला और पूर्णा गाने लगी।


अध्याय 2

काशी के आर्य-मंदिर में पंडित अमरनाथ का व्याख्यान हो रहा था। श्रोता लोग मंत्रमुग्ध से बैठे सुन रहे थे। प्रोफेसर दाननाथ ने आगे खिसक कर अपने मित्र बाबू


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नहीं तो वह कभी यह इरादा न करते। मैं ऐसे सज्जन प्राणी का उत्साह बढ़ाना अपना धर्म समझती हूँ। उसे गृहस्थी में नहीं फँसाना चाहती।'

प्रेमा - 'तो फिर उन्हें भी होगा।'

प्रेमा - 'तो मैं भी अपना हृदय कठोर बना लूँगी।'

प्रेमा ने हारमोनियम सँभाला और पूर्णा गाने लगी।


अध्याय 2

काशी के आर्य-मंदिर में पंडित अमरनाथ का व्याख्यान हो रहा था। श्रोता लोग मंत्रमुग्ध से बैठे सुन रहे थे। प्रोफेसर दाननाथ ने आगे खिसक कर अपने मित्र बाबू


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