प्रतिज्ञा - Pratigya

कहाँ चले गए थे? देर करके आना हो तो भोजन करके जाया करो।'

प्रेमा ने इसका कुछ उत्तर न दिया। हाँ में हाँ मिलाना न चाहती थी, विरोध करने का साहस न था। बोली - 'अच्छा चल कर भोजन तो कर लो, महाराजिन कल से भुनभुना रही है कि यहाँ बड़ी देर हो जाती है। कोई उसके घर का ताला तोड़ दे, तो कहीं की न रहे।'

दाननाथ दिल में अमृतराय को इतना नीच न समझते थे - कदापि नहीं। उन्होंने केवल प्रेमा को छेड़ने के लिए यह स्वाँग रचा था। प्रेमा बड़े असमंजस


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कहाँ चले गए थे? देर करके आना हो तो भोजन करके जाया करो।'

प्रेमा ने इसका कुछ उत्तर न दिया। हाँ में हाँ मिलाना न चाहती थी, विरोध करने का साहस न था। बोली - 'अच्छा चल कर भोजन तो कर लो, महाराजिन कल से भुनभुना रही है कि यहाँ बड़ी देर हो जाती है। कोई उसके घर का ताला तोड़ दे, तो कहीं की न रहे।'

दाननाथ दिल में अमृतराय को इतना नीच न समझते थे - कदापि नहीं। उन्होंने केवल प्रेमा को छेड़ने के लिए यह स्वाँग रचा था। प्रेमा बड़े असमंजस


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