से निकाल कर तुम अपने हृदय का ओछापन दिखा रहे हो।'
बोले - 'मुझे नहीं मालूम था कि तुम अमृतराय को देवता समझ रही हो, हालाँकि देवता भी फिसलते देखे गए हैं।'
दाननाथ - 'तो फिर लीडर कैसे बनते, हम जैसों की श्रेणी में न आ जाते? अपने त्याग का सिक्का जनता पर कैसे बैठाते?'
इतने में वृद्ध माता आ कर खड़ी हो गईं। दाननाथ ने पूछा - 'क्या है, अम्माँ जी?'
दाननाथ ने हँस कर कहा - 'यही मुझसे लड़ रही है, अम्माँ जी, मैं तो बोलता भी नहीं।'
से निकाल कर तुम अपने हृदय का ओछापन दिखा रहे हो।'
बोले - 'मुझे नहीं मालूम था कि तुम अमृतराय को देवता समझ रही हो, हालाँकि देवता भी फिसलते देखे गए हैं।'
दाननाथ - 'तो फिर लीडर कैसे बनते, हम जैसों की श्रेणी में न आ जाते? अपने त्याग का सिक्का जनता पर कैसे बैठाते?'
इतने में वृद्ध माता आ कर खड़ी हो गईं। दाननाथ ने पूछा - 'क्या है, अम्माँ जी?'
दाननाथ ने हँस कर कहा - 'यही मुझसे लड़ रही है, अम्माँ जी, मैं तो बोलता भी नहीं।'