प्रतिज्ञा - Pratigya

अमृतराय के कान में कहा - 'रटी हुई स्पीच है।' अमृतराय स्पीच सुनने में तल्लीन थे। कुछ जवाब न दिया।

अमृतराय ने फिर भी कुछ जवाब न दिया। एक क्षण के बाद दाननाथ ने फिर कहा - 'भाई, मैं तो जाता हूँ।'

दाननाथ - 'तुम कब तक बैठे रहोगे?'

दाननाथ - 'बस, हो निरे बुद्धू, अरे स्पीच में है क्या? रट कर सुना रहा है।'

दाननाथ - 'अजी घंटों बोलेगा। राँड़ का चर्खा है या स्पीच है।'

दाननाथ - 'पछताओगे। आज प्रेमा भी खेल में आएगी।'

दाननाथ


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अमृतराय के कान में कहा - 'रटी हुई स्पीच है।' अमृतराय स्पीच सुनने में तल्लीन थे। कुछ जवाब न दिया।

अमृतराय ने फिर भी कुछ जवाब न दिया। एक क्षण के बाद दाननाथ ने फिर कहा - 'भाई, मैं तो जाता हूँ।'

दाननाथ - 'तुम कब तक बैठे रहोगे?'

दाननाथ - 'बस, हो निरे बुद्धू, अरे स्पीच में है क्या? रट कर सुना रहा है।'

दाननाथ - 'अजी घंटों बोलेगा। राँड़ का चर्खा है या स्पीच है।'

दाननाथ - 'पछताओगे। आज प्रेमा भी खेल में आएगी।'

दाननाथ


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