प्रतिज्ञा - Pratigya

में कहता जाता था - यह देखो चैपलिन आया - वाह-वाह! क्या कहने हैं पट्ठे, तेरे दम का जमूड़ा है - अरे यार, किधर देख रहे हो, जरा इस औरत को देखो, सच कहता हूँ, यह मुझे पानी भरने को नौकर रख ले, तो रह जाऊँ-वाह! ऐसी-ऐसी परियाँ भी दुनिया में हैं। एक हमारा देश खूसट है, तुम तो सो रहे हो जी।'

प्रेमा ने कहा - 'बड़ी जल्दी लौटे, अभी ग्यारह ही तो बजे हैं।'

प्रेमा ने तिनक कर कहा - 'झूठ मत बोलो, भाई साहब पकड़ ले गए। उन्होंने कहा होगा,


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में कहता जाता था - यह देखो चैपलिन आया - वाह-वाह! क्या कहने हैं पट्ठे, तेरे दम का जमूड़ा है - अरे यार, किधर देख रहे हो, जरा इस औरत को देखो, सच कहता हूँ, यह मुझे पानी भरने को नौकर रख ले, तो रह जाऊँ-वाह! ऐसी-ऐसी परियाँ भी दुनिया में हैं। एक हमारा देश खूसट है, तुम तो सो रहे हो जी।'

प्रेमा ने कहा - 'बड़ी जल्दी लौटे, अभी ग्यारह ही तो बजे हैं।'

प्रेमा ने तिनक कर कहा - 'झूठ मत बोलो, भाई साहब पकड़ ले गए। उन्होंने कहा होगा,


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